Lunar Eclipse 2026: नए साल में पूर्णिमा पर होगा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा, सूतक काल भी रहेगा मान्य

Arvind Dubey

By Arvind Dubey
Jan 2, 2026, 13:25 PM IST

आज का राशिफल: बल्ड मून और होलिका दहन का महत्व नए साल 2026 में 3 मार्च को एक अद्वितीय खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसे सभी लोग ब्लड मून के नाम से जानते हैं। इस दिन चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा, जिससे यह एक खास अनुभव बनेगा। यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे…

Lunar Eclipse 2026: नए साल में पूर्णिमा पर होगा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा, सूतक काल भी रहेगा मान्य

आज का राशिफल: बल्ड मून और होलिका दहन का महत्व

नए साल 2026 में 3 मार्च को एक अद्वितीय खगोलीय घटना होने जा रही है, जिसे सभी लोग ब्लड मून के नाम से जानते हैं। इस दिन चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा, जिससे यह एक खास अनुभव बनेगा। यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:45 बजे तक रहेगा। भारत में यह ग्रहण शाम को दिखाई देगा, जिससे इसे लेकर कई लोगों के मन में प्रश्न उठने लगे हैं कि इस दिन होलिका दहन कब होगा।

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा 2 मार्च को होगी, जो शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:07 बजे तक मान्य रहेगी। इस स्थिति के कारण, होलिका दहन के दिन को लेकर कंफ्यूजन हो सकता है। खासकर, ग्रहण के चलते इस दिन शुभ कार्य करने में भी बाधा आएगी, क्योंकि चंद्र ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों की मान्यता नहीं होती है।

ग्रहण के प्रभाव और सूतक

इस वर्ष का पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होगा, जो भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इसके साथ ही, सूतक काल भी लागू होगा, जो सुबह 6:20 बजे से लग जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। यह ग्रहण विशेष रूप से पातक दोष का कारण बनता है, जिसके चलते लोग दान और पुण्य के कार्यों में संलग्न होने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण के पश्चात गंगा स्नान और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति की भी अनुभूति कराता है।

2026 में अन्य ग्रहणों की जानकारी

वर्ष 2026 में 28 अगस्त को दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। यह ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसके अलावा, वर्ष के दूसरे महीने में एक सूर्य ग्रहण भी होगा, जो अंटार्कटिका और दक्षिणी अफ्रीका में दिखाई देगा, लेकिन भारत में इसका कोई असर नहीं होगा।

इस साल में कुल दो सूर्य ग्रहण भी लगेंगे। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को होगा, जिसे रिंग ऑफ फायर के नाम से जाना जाता है। वहीं, दूसरा पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को लगेगा।

विशेष ध्यान देने योग्य बातें

  • ग्रहण के दिन शुभ कार्यों से बचें।
  • सूतक काल में कोई भी धार्मिक कार्यक्रम न करें।
  • ग्रहण के बाद दान और गंगा स्नान का महत्व बढ़ जाता है।
  • ग्रहण के समय चंद्रमा का रंग लाल दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है।

इस प्रकार, ब्लड मून की इस अद्वितीय घटना के साथ होलिका दहन की तिथियों को लेकर जो कंफ्यूजन उत्पन्न हो रहा है, उसे समझना महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं और खगोलीय घटनाओं का ज्ञान हमें अपने जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद कर सकता है।

हालांकि, इस आलेख में दी गई जानकारियों की सत्यता को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। इसलिए, विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।



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