इलाहाबाद हाईकोर्ट का राज्य सरकार को वेंटिलेटर की उपलब्धता पर निर्देश
लखनऊ, 9 मिनट पहले – इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और आवश्यकता के संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। यह महत्वपूर्ण निर्देश ‘वी द पीपल’ संस्था की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने जारी किया।
कोर्ट ने यह निर्णय कोविड-19 महामारी के दौरान वेंटिलेटर की कमी को ध्यान में रखते हुए लिया। न्यायालय ने कहा कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए राज्य सरकार को वेंटिलेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत प्रणाली का निर्माण करना चाहिए। यह निर्देश प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है।
लखनऊ के प्राथमिक अस्पतालों में वेंटिलेटर की स्थिति
कोर्ट ने राज्य सरकार से यह जानकारी भी मांगी है कि लखनऊ के प्राथमिक स्तर के अस्पतालों, जैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है या नहीं। इसके साथ ही, यदि सुविधा है, तो यह भी पूछा गया है कि क्या वहां प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हैं। यह जानकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है।
न्यायालय ने राजधानी लखनऊ के अस्पतालों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक श्रेणियों में विभाजित करने का सुझाव दिया। इसके तहत, एसजीपीजीआई, केजीएमयू और लोहिया जैसे प्रमुख संस्थानों की वेंटिलेटर की संख्या को मानकों के अनुसार सुनिश्चित किया गया है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि यह देखना आवश्यक है कि मरीजों की वास्तविक आवश्यकता इन मानकों से अधिक तो नहीं है।
राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश
राज्य सरकार को लखनऊ खंडपीठ के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 16 जनपदों के सभी तीन स्तरों के अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता और आवश्यकता का आकलन कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है। यह सुनवाई 8 दिसंबर को होगी, जिसके दौरान राज्य सरकार को अपनी तैयारियों और कदमों का विवरण प्रस्तुत करना होगा।
इस मामले में उच्च न्यायालय का यह कदम न सिर्फ प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को ऊँचा उठाने के लिए आवश्यक है, बल्कि यह मरीजों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों को भी प्राथमिकता देने का एक प्रयास है। कोविड-19 महामारी ने हमें यह सिखाया है कि आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती कितनी महत्वपूर्ण होती है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए यह आवश्यक है कि प्रदेश सरकार वेंटिलेटर की उपलब्धता के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य संसाधनों की भी समीक्षा करे। अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों की कमी और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता न केवल मरीजों के इलाज में बाधा डालती है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है।
राज्य सरकार को चाहिए कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए और अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का कार्य तेजी से करे। इसके अलावा, स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर अपेक्षाएँ और भी अधिक बढ़ जाएंगी।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि उच्च न्यायालय का यह निर्देश स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक है कि सभी संबंधित पक्ष गंभीरता से कार्य करें ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का सामना किया जा सके।











