एकता दिवस: सरदार वल्लभ भाई पटेल के छात्र जीवन की अनकही कहानियाँ
आज देशभर में **एकता दिवस** मनाया जा रहा है। यह दिन हर साल **31 अक्टूबर** को मनाया जाता है, जो कि भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और लौह पुरुष **सरदार वल्लभ भाई पटेल** के जन्मदिन के अवसर पर है। सरदार पटेल को उनकी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और भारत को एकजुट करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। यह दिन हमें उनकी प्रेरणा और बलिदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
सरदार पटेल की छात्र जीवन की रोचक घटनाएँ
सरदार पटेल के जीवन को समझने के लिए उनके छात्र जीवन से जुड़े कुछ अनकहे किस्सों को जानना आवश्यक है। उनके छात्र जीवन में कई घटनाएँ ऐसी थीं, जिन्होंने न केवल उन्हें आकार दिया बल्कि उनके साहस और नेतृत्व के गुणों को भी उभारा। आइए जानते हैं उनके कुछ प्रेरणादायक किस्से।
क्लास में लेट आने वाले टीचर को सबक सिखाया
एक दिन वल्लभ भाई पटेल की कक्षा में टीचर का इंतजार किया जा रहा था, तभी एक छात्र ने कहा, “अग्रवाल सर आज फिर लेट हैं।” इस पर वल्लभ भाई ने सुझाव दिया कि क्यों न हम गाना गाकर समय बिताएं। जब अग्रवाल सर कक्षा में आए, तो उन्होंने छात्रों को गाते हुए देखकर गुस्से में आकर कहा, “क्या तुम लोगों को गाने की इजाजत किसने दी?”
वल्लभ ने साहसिकता से उत्तर दिया, “सर, हम जानते हैं कि यह इंग्लिश क्लास है। लेकिन आपके आने तक शोर मचाने के बजाय गाना गाना ज्यादा उचित था।” इस पर टीचर ने उन्हें क्लास से बाहर निकालने के लिए कहा, लेकिन वल्लभ के साथ सभी छात्रों ने कक्षा छोड़ दी।
इस घटना ने वल्लभ भाई के साहस को दर्शाया और यह साबित किया कि वे अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस रखते थे, भले ही वे केवल **6वीं कक्षा** में ही थे।
क्रांतिकारी व्यवहार के चलते बदलना पड़ा स्कूल
सरदार वल्लभ भाई पटेल का व्यवहार हमेशा से क्रांतिकारी था। एक बार, जब उनके शिक्षक एलजेब्रा की समस्या हल करने में असफल रहे, तो वल्लभ ने उनके सामने खड़े होकर कहा, “सर, यह तरीका सही नहीं है।” शिक्षक ने मजाक में कहा कि क्यों न वह स्वयं आकर समस्या हल करें। वल्लभ ने ब्लैकबोर्ड पर सही समाधान दिखाया और कुर्सी पर भी बैठ गए।
इस घटना ने शिक्षक को नाराज कर दिया, लेकिन वल्लभ ने इस पर चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने प्रिंसिपल से कहा कि वह केवल शिक्षक की आज्ञा का पालन कर रहे थे। इस तरह की घटनाएं वल्लभ के साहस और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।
भ्रष्ट टीचर के खिलाफ किया प्रोटेस्ट
वल्लभ ने नादियाड़ के स्कूल में दाखिला लिया, जहां एक शिक्षक बच्चों को महंगे दामों पर स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर करता था। वल्लभ ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और अपने दोस्तों को एकजुट किया। उन्होंने एक हफ्ते के भीतर स्कूल के प्रिंसिपल से मुलाकात की और शिक्षक की हरकतों को रोकने का वादा करवाया।
टीचर के लिए चुनाव प्रचार कर जिताया
एक बार, वल्लभ भाई के शिक्षक चीनूभाई ने स्थानीय चुनाव में भाग लिया। उनके खिलाफ एक अमीर उम्मीदवार बाबूभाई था, जो उन्हें लगातार नीचा दिखा रहा था। वल्लभ ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चुनाव प्रचार करने का निर्णय लिया और अंततः उनके शिक्षक की जीत हुई। यह घटना वल्लभ की नेतृत्व क्षमता और अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान को दर्शाती है।
बिना ट्यूशन के लॉ की डिग्री हासिल की
वल्लभ भाई ने बैरिस्टर बनने का सपना देखा, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्हें इंग्लैंड नहीं भेजा जा सका। उन्होंने प्राइवेट रूप से लॉ की पढ़ाई की, बिना किसी ट्यूशन के। वे अपने सहकर्मियों से किताबें उधार लेकर पढ़ाई करते थे और अदालतों में वकीलों की बहस को सुनते थे। अंततः, **1910** में, उन्होंने इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की।
निष्कर्ष
सरदार वल्लभ भाई पटेल का छात्र जीवन न केवल उनके साहस और नेतृत्व की कहानी है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस किस तरह से किसी व्यक्ति को महान बना सकता है। उनकी जीवन की ये कहानियाँ आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं और यह दर्शाती हैं कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति भी अपने कार्यों से इतिहास रच सकता है।
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