कोटा में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: नकली ओआरएस पेय पदार्थ की बिक्री पर रोक
राजस्थान के कोटा शहर में खाद्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है, जिसमें बाजार में स्वास्थ्य के नाम पर आम जनता को गुमराह करने वाले उत्पादों की पहचान की गई है। हाल ही में, ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट्स) जैसे नामों से बेचे जा रहे फ्रूट ड्रिंक और पेय पदार्थों की जांच की गई। ये उत्पाद दिखने और नाम से ओआरएस जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में इनके औषधीय उपयोग नहीं होते।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉक्टर टी. शुभमंगला के निर्देश पर, कोटा के सीएमएचओ डॉक्टर नरेंद्र नागर के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा दल ने न्यू अर्जुन विहार प्रथम स्थित एक फार्मेसी फर्म पर कार्रवाई की। जांच में पाया गया कि फर्म “अमृतांजन इलेक्ट्रो रिहाइड्रेट एप्पल ड्रिंक” नामक रेडी टू सर्व पेय को ओआरएस के रूप में बेच रही थी। टीम ने मौके से 200-200 मिलीलीटर की 110 मूल बोतलें, कुल **22,000 एमएल** ड्रिंक को सीज किया और नमूना जांच के लिए भेजा।
बाजार में मिले भ्रामक उत्पादों की सूची
जांच के दौरान, फर्म का खरीद बिल अमृतांजन हेल्थकेयर लिमिटेड, तमिलनाडु का पाया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित ड्रिंक ब्रांडों को रिकॉल करवाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। डॉ. नरेंद्र नागर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि असली ओआरएस दवा औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम 1945 के तहत पंजीकृत और डीसीजीआई द्वारा मान्यता प्राप्त उत्पाद है। इसका उपयोग डायरिया और डिहाइड्रेशन के इलाज में किया जाता है।
हालांकि, बाजार में मिल रहे ये पेय पदार्थ केवल फ्रूट बेस्ड या नॉन-कार्बोनेटेड ड्रिंक हैं, जिनका औषधीय उपयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे भ्रामक नामों वाले कुछ उत्पादों में शामिल हैं:
- ओआरएस अल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक
- पेपरबॉट स्विंग जूसी ओआरएस
- स्टेफिट
- ओआरएस फिट
- अमृतांजन इलेक्ट्रोलाइट
- बॉडी आर्मर
- फ्रूटॉस
- फास्टअप रिलोड
खाद्य सुरक्षा टीम की भूमिका और कार्रवाई
इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा टीम के कुछ प्रमुख सदस्यों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी चंद्रवीर सिंह, अरुण सक्सेना, संदीप अग्रवाल और मोजीलाल कुंभकार शामिल थे। इन अधिकारियों ने मिलकर इस भ्रामक व्यापार को रोकने के लिए कड़ी मेहनत की है। डॉ. नरेंद्र नागर ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम जनता को सही जानकारी देने की दिशा में भी एक कदम है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि इस तरह के उत्पाद भविष्य में बाजार में न बिकें। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि लोगों को सही और सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध हो सकें। इस मामले में कार्रवाई के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि लोग भ्रामक नामों वाले उत्पादों से सतर्क रहेंगे और अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहेंगे।
इस प्रकार की कार्रवाइयों से खाद्य सुरक्षा विभाग का उद्देश्य न केवल लोगों को सुरक्षित खाद्य सामग्री प्रदान करना है, बल्कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता को भी सुनिश्चित करना है। इस घटना से यह संदेश भी जाता है कि खाद्य सुरक्षा विभाग अपने दायित्वों के प्रति गंभीर है और वह लोगों की सेहत को प्राथमिकता देता है।
कोटा की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा विभाग किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा और जनता की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेगा।











