सिवनी जिले में लापता नाबालिग बालिका की सुरक्षित वापसी
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की डूंडासिवनी पुलिस ने हाल ही में एक नाबालिग बालिका को सफलतापूर्वक खोज निकाला है। यह बालिका कुछ समय पहले लापता हो गई थी और पुलिस ने उसे उसके परिजनों को सुरक्षित सौंप दिया। इस मामले में नाबालिग को भगा ले जाने वाले युवक को भी गिरफ्तार किया गया है, जिससे पुलिस ने कार्रवाई की गति को और तेज किया है।
नाबालिग के लापता होने की रिपोर्ट
डूंडासिवनी थाने के प्रभारी चैनसिंह उइके ने जानकारी दी कि नाबालिग के पिता ने कुछ दिन पहले थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पिता ने बताया कि उनकी लगभग 13 वर्षीय बेटी घर से खेलने के लिए निकली थी, लेकिन वह वापस नहीं लौटी। इसके बाद उन्होंने आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
पिता की शिकायत पर पुलिस ने धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को सूचित किया गया और नाबालिग की खोज के लिए तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस के प्रयासों से पता चला कि एक युवक, रुपेश पारधी, नाबालिग को अपहरण कर महाराष्ट्र के गोंदिया ले गया है।
नाबालिग की खोज और आरोपी की गिरफ्तारी
पुलिस की एक टीम तुरंत रात में गोंदिया के लिए रवाना हुई। वहां पर टीम ने नाबालिग बालिका को आरोपी के चंगुल से मुक्त कराकर सुरक्षित रूप से उसके परिजनों के पास पहुंचा दिया। विवेचना में यह भी सामने आया कि आरोपी रुपेश पारधी ने नाबालिग को शादी का प्रलोभन देकर अपने साथ भगाने की कोशिश की थी। इस मामले में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी की पहचान रुपेश पुत्र रामसिंह पारधी (18) के रूप में की गई है, जो पाथरफोड़ी, थाना कान्हीवाड़ा का निवासी है।
पुलिस की तत्परता और प्रयास
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी चैनसिंह उइके के साथ-साथ निरीक्षक सतीश तिवारी, संदीपिका ठाकुर, अनंती मर्सकोले, मोहनीस बैस, एसआई दामिनी हेडाऊ, एएसआई बालकृष्ण त्रिगाम, देवेंद्र जायसवाल (सायबर सेल), प्रधान आरक्षक परवेज सिद्धिकी, आरक्षक कृष्णकुमार भालेकर, विक्रम देशमुख, सीताराम जावरे, अनुराग दुबे और अजय बघेल (सायबर सेल) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय में चिंता का माहौल पैदा किया, बल्कि पुलिस की तत्परता और उनके द्वारा उठाए गए कदमों ने एक सकारात्मक संदेश भी दिया है कि ऐसी घटनाओं के प्रति प्रशासन कितना संवेदनशील है।
निष्कर्ष
इस घटना के बाद, पुलिस ने यह संदेश दिया है कि वे नाबालिगों की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लेते हैं और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हैं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय पुलिस बल किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्परता से कार्य करने के लिए तैयार है। आगे भी इस तरह की घटनाओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।










