झारखंड सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही है
झारखंड सरकार इस समय एक गहरे वित्तीय संकट का सामना कर रही है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन से लेकर विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवश्यक खर्चों में कठिनाई उत्पन्न हो गई है। पिछले ढाई महीनों से सरकार को वेज एंड मीन एडवांस और ओवरड्राफ्ट के सहारे अपने राजकोष को चलाना पड़ रहा है। अगस्त के अंत में राज्य के खजाने की स्थिति गंभीर हो गई थी, जिससे सरकार को अपने वित्तीय प्रबंधन पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।
नकदी की स्थिति और ऋण लेने की योजना
वर्तमान में राज्य के पास लगभग 3000 से 4000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध है। दूसरी तिमाही के दौरान, सरकार ने बाजार से 3000 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। वर्तमान वित्तीय दबाव को देखते हुए, सरकार ने दिसंबर तक एक और 3000 करोड़ रुपये का ऋण लेने की संभावना पर विचार करना शुरू कर दिया है।
आय में कमी और बजट में कटौती
खनिजों पर सेस लगाने से कुछ हद तक आय में वृद्धि हुई है, लेकिन यह वृद्धि सरकार के लिए पर्याप्त नहीं है। खजाने की स्थिति को देखते हुए, राज्य सरकार ने पहले अनुपूरक बजट के दौरान कई विभागों के योजना बजट की मांगों को खारिज कर दिया है। इन विभागों ने कुल 11,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजट मांगी थी, लेकिन सरकार ने केवल 3000 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, संकट से निपटने के लिए सरकार के पास सिंकिंग फंड का उपयोग करने का विकल्प भी है।
कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का आश्वासन
राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कल्याणकारी योजना बाधित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल आवश्यक योजनाओं पर केंद्रित है और किसी भी प्रकार की वित्तीय कमी से कल्याणकारी योजनाओं पर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राजस्व संग्रह में कमी
राजस्व संग्रह की स्थिति बेहद कमजोर है, और लक्ष्य के अनुसार प्राप्ति का प्रतिशत भी काफी कम है। विभिन्न मदों के अनुसार राजस्व संग्रह की स्थिति निम्नलिखित है:
- वाणिज्य कर: लक्ष्य 26,500 करोड़ – प्राप्ति 11,000 करोड़ (42%)
- खनन सेस: लक्ष्य 6,400 करोड़ – प्राप्ति 2,590 करोड़ (40%)
- खनन रॉयल्टी: लक्ष्य 15,500 करोड़ – प्राप्ति 5,200 करोड़ (34%)
- उत्पाद: लक्ष्य 3,000 करोड़ – प्राप्ति 1,400 करोड़ (48%)
- भू-राजस्व: लक्ष्य 1,800 करोड़ – प्राप्ति 850 करोड़ (46%)
- निबंधन: लक्ष्य 1,500 करोड़ – प्राप्ति 820 करोड़ (55%)
- परिवहन: लक्ष्य 2,400 करोड़ – प्राप्ति 850 करोड़ (40%)
- वन राजस्व: लक्ष्य 1,200 करोड़ – प्राप्ति 340 करोड़ (28%)
- सिंचाई: लक्ष्य 380 करोड़ – प्राप्ति 220 करोड़ (57%)
- अन्य: लक्ष्य 2,376 करोड़ – प्राप्ति 580 करोड़ (24%)
- कुल: लक्ष्य 1,25,153 करोड़ – प्राप्ति 48,400 करोड़ (39%)
सरकार की प्राथमिकताएं और योजनाएं
सरकार की प्राथमिकता सूची में ‘मंईयां सम्मान’, ‘सर्वजन पेंशन’, और ‘200 यूनिट तक फ्री बिजली’ जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के लिए चालू वित्त वर्ष में 33,250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि मंईयां योजना पर सालाना 16,000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इस साल के बजट में सामाजिक क्षेत्र के लिए सबसे अधिक 62,840 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
विकास कार्यों पर प्रभाव
राज्य सरकार बहुत हद तक केंद्र से प्राप्त सहायता, अनुदान, केंद्रीय करों से हिस्सेदारी, जीएसटी क्षतिपूर्ति और कई केंद्रीय योजनाओं पर निर्भर है। समाज कल्याण, शिक्षा, नगर विकास, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के मद में खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन बजट की कमी से नए सड़क निर्माण, ग्रामीण सड़क मरम्मत, और पौधारोपण के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
योजना व्यय की स्थिति
सितंबर तक सरकार केवल 34% योजना राशि खर्च कर पाई है। ग्रामीण कार्य और आवास के लिए 50% खर्च किया गया है, जबकि पेयजल, पशुपालन, खान भूतत्व और पंचायती राज विभाग में खर्च का प्रतिशत 10% से कम है। सितंबर 2025 तक राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति मात्र 39% रही है, जो कि चिंता का विषय है।
झारखंड सरकार को इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि विकास योजनाएं सुचारू रूप से चल सकें और राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।










