Temple: छत्तीसगढ़ में श्रीयंत्र से बना महालक्ष्मी मंदिर, पांडवों की विरासत

सारांश

महालक्ष्मी देवी का प्राचीन मंदिर: लखनी देवी मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित लखनी देवी मंदिर, महालक्ष्मी देवी का एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ द्वापर युग में पांडवों ने अश्वमेघ यज्ञ किया था और इसी समय मां लक्ष्मी स्वयं प्रकट हुईं। इस मंदिर का निर्माण […]

kapil6294
Oct 20, 2025, 8:01 PM IST

महालक्ष्मी देवी का प्राचीन मंदिर: लखनी देवी मंदिर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित लखनी देवी मंदिर, महालक्ष्मी देवी का एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्थल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ द्वापर युग में पांडवों ने अश्वमेघ यज्ञ किया था और इसी समय मां लक्ष्मी स्वयं प्रकट हुईं। इस मंदिर का निर्माण लगभग 800 वर्षों पूर्व हुआ था, और यह श्रीयंत्र के आकार में बना हुआ है, जिसमें महालक्ष्मी अष्टकमल (आठ पंखुड़ियों वाले कमल) पर विराजमान हैं।

दीपावली के अवसर पर यहां विशेष पूजा एवं अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है, जिसका उद्देश्य भक्तों की सुख, समृद्धि और धन-वैभव की कामना को पूरा करना है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बन चुका है, जहाँ लोग आकर मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा करते हैं।

रतनपुर: ऐतिहासिक नगरी और पौराणिक कथाएँ

बिलासपुर से 25 किलोमीटर दूर स्थित रतनपुर, प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां की पहचान आदि शक्ति महामाया देवी के नाम पर है, लेकिन इसके साथ ही कई पौराणिक मान्यताएँ भी जुड़ी हुई हैं। रतनपुर के मंदिरों और मूर्तियों में त्रेता युग के भगवान श्रीराम से जुड़ी कथाएँ और द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान किचक वध की कहानी प्रचलित है।

यहां की ऐतिहासिक कलाकृतियाँ और पुरातात्विक स्थल न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि कैसे प्राचीन समय में लोग इन स्थलों की पूजा करते थे। रतनपुर का यह धार्मिक स्थान श्रद्धालुओं के लिए एक अद्भुत अनुभव प्रदान करता है।

पांडवों का यज्ञ और मां लक्ष्मी का प्रकट होना

मंदिर के पुजारी रेवाराम उपाध्याय के अनुसार, पांडवों के अश्वमेघ यज्ञ से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कथा है। द्वापर युग के अंत में, जब पांडव अज्ञातवास में थे, तब उन्होंने किचक का वध किया। इस वध के कारण उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडवों को रतनपुर में अश्वमेघ यज्ञ करने की सलाह दी गई।

हालांकि, यज्ञ के लिए पांडवों के पास धन-धान्य की कमी थी। इसी समय, उन्होंने महालक्ष्मी देवी की विशेष पूजा की। उनकी भक्ति से मां लक्ष्मी स्वयं प्रकट हुईं और पांडवों को धन-धान्य का आशीर्वाद दिया। इसके बाद पांडवों ने सफलतापूर्वक अश्वमेघ यज्ञ किया और इस पाप से मुक्ति पाई।

कल्चुरी राजा का योगदान: मंदिर का निर्माण

लखनी देवी मंदिर की स्थापना कल्चुरी राजा रत्नदेव तृतीय के शासनकाल में हुई थी। उन्हें इस मंदिर का निर्माण अपने प्रधान मंत्री गंगाधर से सलाह लेकर 1179 में करवाया गया था। इस मंदिर का निर्माण उस समय के सामाजिक और धार्मिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

राजा के समय, राज्य में अकाल और महामारी फैली हुई थी। जब मंदिर का निर्माण हुआ, तो धीरे-धीरे राज्य में सुख, शांति और समृद्धि लौट आई। मंदिर की वास्तुकला पुष्पक विमान के समान है, जिसे शास्त्रों में वर्णित किया गया है।

विशेष पूजा और आराधना का महत्व

लखनी देवी मंदिर में विशेष पूजा-आराधना नवरात्रि के दौरान की जाती है। भक्त यहां ज्वारा कलश स्थापित करते हैं और मां लक्ष्मी से सुख-शांति और धन-धान्य की कामना करते हैं। यह मंदिर पहली बार है जहाँ ज्वारा कलश के नाम पर रसीद काटी जाती है। दीपावली के समय भी यहां विशेष पूजा का आयोजन होता है।

इस वर्ष दीपोत्सव पर्व 18 अक्टूबर से प्रारंभ हुआ है, जिसमें तीसरे दिन कार्तिक अमावस्या पर महालक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं और इसे धन, वैभव और खुशहाली की कामना से मनाया जाता है।

दिवाली पर मां काली की पूजा की परंपरा

बिलासपुर में कार्तिक अमावस्या पर दिवाली पर्व मनाने के साथ-साथ मां काली की पूजा करने की परंपरा भी है। यह परंपरा पिछले 100 वर्षों से चल रही है। पूजा की विधि में व्रती आधी रात को मां काली की पूजा करते हैं, जिसमें 108 कमल के फूलों से पुष्पांजलि अर्पित की जाती है।

धार्मिक आस्था और परंपराओं के साथ, यह पर्व लोगों को एकजुट करता है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है। इस दिन मां के दरबार को 108 दीपों से सजाया जाता है, जिससे वातावरण में एक दिव्य और पवित्रता का अनुभव होता है।

इस प्रकार, लखनी देवी मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक हैं। यहां आने वाले भक्तों को मां लक्ष्मी और मां काली की कृपा से सुख, समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है।


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कपिल शर्मा 'जागरण न्यू मीडिया' (Jagran New Media) और अमर उजाला में बतौर पत्रकार के पद पर कार्यरत कर चुके है अब ये खबर २४ लाइव के साथ पारी शुरू करने से पहले रिपब्लिक भारत... Read More

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