Employment: ‘बिहार में फैक्ट्रियां होती तो बाहर नहीं जाना पड़ता’

सारांश

छठ पर्व के बाद भागलपुर में रेलवे स्टेशनों पर भीड़ का सैलाब भागलपुर में लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व समाप्त होने के बाद रेलवे स्टेशनों पर भीड़ में तेजी से इजाफा हुआ है। बिहार से रोजगार की तलाश में दिल्ली और मुंबई जाने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। […]

kapil6294
Oct 30, 2025, 2:35 PM IST

छठ पर्व के बाद भागलपुर में रेलवे स्टेशनों पर भीड़ का सैलाब

भागलपुर में लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व समाप्त होने के बाद रेलवे स्टेशनों पर भीड़ में तेजी से इजाफा हुआ है। बिहार से रोजगार की तलाश में दिल्ली और मुंबई जाने वाले यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेष रूप से गुरुवार को आनंद विहार जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखी गई, जिससे स्टेशनों का माहौल काफी हलचल भरा नजर आया। इतना ही नहीं, इस दौरान सूरत जाने वाले यात्रियों की भी तादाद बढ़ी है।

त्योहार के दौरान अपने घर लौटे मजदूर अब एक-एक कर फिर से दूसरे राज्यों में काम की तलाश में निकलने लगे हैं। यह पलायन राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को भागलपुर में होने वाला है। लेकिन, इससे पहले ही हजारों की संख्या में लोग राज्य को छोड़कर जा रहे हैं।

स्टेशन पर भीड़ और रेलवे प्रशासन की तैयारियां

भागलपुर रेलवे स्टेशन पर का दृश्य मानो किसी विशेष ट्रेन के आगमन का संकेत दे रहा था। हर डिब्बे के बाहर लोगों की भीड़, हाथों में बैग, सिर पर झोला और बच्चों के साथ महिलाएं अपने गंतव्य की ओर बढ़ने के लिए तैयार थी। रेलवे प्रशासन ने इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्लेटफार्म पर सुरक्षा बलों की तैनाती की है। यात्रियों को सुरक्षित रूप से कतारबद्ध तरीके से ट्रेन में चढ़ाया जा रहा है ताकि किसी प्रकार का हादसा न हो।

मालदा मंडल के एडीआरएम शिवकुमार प्रसाद ने बताया कि त्योहार के बाद हर साल यात्रियों की संख्या में वृद्धि होती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) की टीमें तैनात की गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यात्री सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

मजदूरों की मजबूरी और उनके विचार

भीड़ के बीच बैठे सुनील यादव, जो दिल्ली के आजादपुर मंडी में मजदूरी करते हैं, ने बताया कि त्योहार के समय वह अपने घर आते हैं, अपने माता-पिता को देखते हैं, लेकिन अब फिर से जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “बिहार में कोई काम नहीं है। जितनी मेहनत यहां करते हैं, उतनी कमाई नहीं होती। दिल्ली जाकर कुछ कमा पाते हैं।” उनकी बातों में बिहार में रोजगार की कमी की चिंता साफ झलकती है।

भागलपुर में 11 नवंबर को होने वाले मतदान के बारे में बात करते हुए सुनील ने कहा, “हमारे लिए वोट जितना महत्वपूर्ण है, उतना नौकरी भी है। इसलिए हमें प्रदेश लौटना जरूरी है। अगर बिहार में फैक्ट्रियां होतीं, तो हम यहीं रोजगार करते और वोट भी देते। यहां के हालात सच में दयनीय हैं।”

सरकारी नीतियों पर सवाल

विक्रमशिला एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे दिलीप यादव ने भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “सरकार सिर्फ वोट मांगती है, लेकिन रोजगार नहीं देती। हर बार वादा करती है कि फैक्ट्री खुलेगी, लेकिन कुछ नहीं होता। मजबूरी में घर छोड़ना पड़ता है।” यात्रियों के चेहरों पर अपने गांव और परिवार को छोड़ने की बेबसी साफ झलक रही थी।

कुछ यात्रियों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे भेजना जरूरी है, जबकि कुछ अपने परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए बाहर जा रहे हैं। इस प्रकार का पलायन न केवल आर्थिक मजबूरी का परिणाम है, बल्कि यह बिहार के विकास की दिशा में भी एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

आगे की चुनौतियां

बिहार की वर्तमान स्थिति और रोजगार के अवसरों की कमी को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि राज्य को बेहतर औद्योगिक नीतियों की आवश्यकता है। अगर सरकार रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाती है, तो यह स्थिति बदल सकती है। लेकिन फिलहाल, बिहार के मजदूरों को मजबूरी में अपने घरों को छोड़कर जाने को विवश होना पड़ रहा है। यह एक गंभीर विषय है जिसे राज्य सरकार को प्राथमिकता से हल करना चाहिए।

इस प्रकार, छठ पर्व के बाद भागलपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ न केवल त्योहार के बाद की सामान्य स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह बिहार के विकास और रोजगार की दिशा में भी एक गंभीर प्रश्न उठाती है।

Bihar News in Hindi


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कपिल शर्मा 'जागरण न्यू मीडिया' (Jagran New Media) और अमर उजाला में बतौर पत्रकार के पद पर कार्यरत कर चुके है अब ये खबर २४ लाइव के साथ पारी शुरू करने से पहले रिपब्लिक भारत... Read More

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