बिहार चुनाव: महागठबंधन के भीतर की जंग
बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर चुनावी जंग के बीच, लगभग एक दर्जन (12) ऐसे क्षेत्रों में मुकाबला महागठबंधन के भीतर ही हो रहा है। इसे RJD-कांग्रेस की तरफ से “फ्रेंडली फाइट” कहा जा रहा है, लेकिन असलियत में ये टकराव आपसी कलह, वोट बंटवारे और असमंजस का कारण बन रहा है। इनमें से अधिकांश सीटों पर महागठबंधन के सहयोगी दल एकमत नहीं हो पा रहे हैं, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
अवस्थिति यह है कि RJD, कांग्रेस, CPI और VIP ने इन 12 सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इस घमासान का सबसे बड़ा असर महागठबंधन के कोर वोट बैंक, जिसमें यादव, मुस्लिम और अति-पिछड़ा वर्ग शामिल हैं, पर पड़ रहा है। इस संबंध में वोटर्स असमंजस में हैं कि उनका “असली” उम्मीदवार कौन है।
महागठबंधन में उठती आवाजें
कई क्षेत्रों में, विशेषकर जहां RJD और कांग्रेस दोनों के यादव उम्मीदवार हैं, वहाँ के वोटर और कार्यकर्ता तेजस्वी यादव के “इशारे” का इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ता भी इस स्थिति से परेशान हैं कि वे किसके लिए प्रचार करें। हालांकि, कुछ सीटों पर महागठबंधन ने नामांकन वापसी करवाकर संकट को टालने का प्रयास किया है, लेकिन इन 12 सीटों पर तनातनी जारी है।
महागठबंधन के भीतर टकराव की प्रमुख सीटें
महागठबंधन के दो सबसे बड़े दलों, RJD और कांग्रेस के बीच कई सीटों पर सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस इन सीटों को अपनी “क्वालिटी” या जीती जा सकने वाली सीट मानती है, क्योंकि 2020 में ये सीटें कांग्रेस के लिए दूसरे स्थान पर रहीं।
- वैशाली: यहाँ RJD के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के संजीव कुमार आमने-सामने हैं। यहाँ कांग्रेस पिछली बार दूसरे नंबर पर थी।
- सुल्तानगंज: RJD के चंदन सिन्हा का मुकाबला कांग्रेस के ललन यादव से है। ललन यादव 2020 में दूसरे स्थान पर रहे थे।
- नरकटियागंज: RJD के दीपक यादव और कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय (पूर्व CM केदार पांडेय के पोते) मैदान में हैं।
- सिकंदरा: यहाँ RJD के दिग्गज नेता उदय नारायण चौधरी का मुकाबला कांग्रेस के विनोद चौधरी से है।
बछवाड़ा: एक विवादित सीट
महागठबंधन के भीतर सबसे विवादित सीट बेगूसराय की बछवाड़ा है। यहाँ CPI के अवधेश राय का मुकाबला कांग्रेस के शिव प्रकाश राय से है। 2020 में CPI के अवधेश राय यहाँ BJP से मात्र 484 वोटों से हारे थे। CPI इसे अपनी “रेड लाइन” सीट मानती है। हालांकि कांग्रेस ने भी अपने युवा नेता को मैदान में उतारा है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं की चिंताएं
इस स्थिति से स्थानीय कार्यकर्ता भी परेशान हैं। बिहारशरीफ के एक स्थानीय वोटर दामोदर मिस्त्री कहते हैं, “हम यह डिसीजन नहीं कर पा रहे हैं कि किसको वोट करें। कांग्रेस के उमैर खान को या CPI के शिव कुमार यादव को?”
कहलगांव में भी यही स्थिति बनी हुई है। यहाँ RJD और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवार हैं, जिससे वोट का बिखराव हो सकता है। स्थानीय निवासी डॉ. प्रवीण कुमार का कहना है, “महागठबंधन से दो प्रत्याशी होने से वोट बिखराव होगा।”
महागठबंधन के भीतर के अन्य टकराव
मामला सिर्फ RJD-कांग्रेस-CPI तक सीमित नहीं है। VIP और IIP भी इस जंग में शामिल हैं।
- गौड़ाबौराम (दरभंगा): यहाँ VIP के मुकेश सहनी के भाई संतोष सहनी और RJD के अफजल अली खान आमने-सामने हैं।
- चैनपुर (कैमूर): यहाँ RJD के बृजकिशोर बिंद और VIP के बाल गोविंद बिंद दोनों ही ‘बिंद’ वोट बैंक में सेंधमारी कर रहे हैं।
- बेलदौर (खगड़िया): यहाँ कांग्रेस के मिथिलेश कुमार निषाद का मुकाबला IIP की अनीसा सिंह से है।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के भीतर का यह टकराव न केवल चुनावी रणनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर वोटर्स के मन में असमंजस की स्थिति भी पैदा कर रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए महागठबंधन को अपने अंदर की बिखराव को सुलझाना होगा, अन्यथा इसका सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।











