राकेश बेदी की नई फिल्म ‘धुरंधर’ में पाकिस्तानी राजनेता का किरदार
हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर’ में अभिनेता राकेश बेदी ने पाकिस्तानी राजनेता जमील खान का किरदार निभाया है, जिसे दर्शकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। बेदी का कहना है कि उन्हें पहले कभी ऐसा मौका नहीं मिला था, जिसके वह हकदार थे। इस फिल्म के माध्यम से उन्होंने एक नए रूप में दर्शकों के सामने आने का प्रयास किया है।
राकेश बेदी का करियर और फिल्मी सफर
राकेश बेदी ने अपने करियर की शुरुआत कॉमेडी किरदारों से की थी, लेकिन अब उन्हें ‘धुरंधर’ से एक महत्वपूर्ण पहचान मिली है। इससे पहले, राकेश बेदी की ‘चश्मे बद्दूर’, ‘एक दूजे के लिए’ जैसी फिल्मों ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई। ‘एक दूजे के लिए’ फिल्म के लिए उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं। बेदी के लिए यह अनुभव एक अद्वितीय था, जिसने उनके करियर को नया मोड़ दिया।
राकेश बेदी का कहना है कि जब उनका टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ आया, तब उन्हें यह एहसास हुआ कि टीवी की ताकत कितनी विशाल है। इस शो से उन्हें काफी लोकप्रियता मिली, लेकिन उनके करियर में ऐसे भी दिन आए जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। वह बताते हैं कि उस समय उन्होंने सिर्फ एक रुपए में केले खा कर गुजारा किया।
राकेश बेदी की सफलता की कहानी
राकेश बेदी की सफलता की कहानी में संघर्ष और संकल्प की महत्ता है। वे कहते हैं, “मैं 45-47 साल से लगातार थिएटर कर रहा हूं।” उनके अनुसार, थिएटर ने उन्हें हमेशा रिलिवेंट रखा है और यह उनकी कला का सही आकलन करने में मदद करता है। उनका नाटक ‘मसाज’ पिछले 23 वर्षों से लगातार चल रहा है, जिसमें वह 24 किरदार निभाते हैं।
उनका मानना है कि पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में उनकी शिक्षा ने उन्हें नए सिरे से सीखने का मौका दिया। वहां से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और पहले फिल्म ‘एहसास’ में काम किया, जिसे शोले के प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी ने प्रोड्यूस किया। यह उनके लिए एक बड़ा मौका था।
‘चश्मे बद्दूर’ और ‘एक दूजे के लिए’ का प्रभाव
राकेश बेदी की पहचान ‘चश्मे बद्दूर’ और ‘एक दूजे के लिए’ जैसी फिल्मों से बनी। ‘एक दूजे के लिए’ फिल्म के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां मिली थीं क्योंकि उनके किरदार के कारण हीरो-हीरोइन की मौत होती है। बेदी का कहना है कि उस समय लोग फिल्मों के प्रति बहुत जुनूनी थे।
उन्हें अपने टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ से भी बहुत लोकप्रियता मिली। वह बताते हैं कि लोग जब उन्हें सड़क पर पहचानते थे, तो उनकी पॉपुलैरिटी बहुत बड़ी थी। राकेश बेदी ने कहा, “टीवी की ताकत का पता तब चला जब मेरे शो के दो-चार एपिसोड ही आए थे।” इस शो के बाद उन्होंने कई चर्चित टीवी शो किए, लेकिन उन्होंने छोटे रोल चुनने का निर्णय लिया ताकि वह अपने थिएटर के काम को जारी रख सकें।
राकेश बेदी का जीवन दर्शन
राकेश बेदी के जीवन में उतार-चढ़ाव तो आए, लेकिन उनका थिएटर हमेशा उनके साथ रहा। वह मानते हैं कि हर एक्टर की जिंदगी में ऐसे उतार-चढ़ाव आते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपके पास फिल्में नहीं हैं, तो थिएटर में काम कर सकते हैं।” यह उनके लिए एक तरह का आत्म-संविधान था जो उन्हें सक्रिय रखता था।
उन्होंने अपने शुरुआती दिनों का एक अनुभव साझा किया, जब उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने बताया, “मैंने अपने परिवार से कभी पैसे नहीं मांगे, सिवाय फिल्म इंस्टीट्यूट की पढ़ाई के। उस वक्त 1 रुपए में 6 केले मिलते थे। मैंने केले खाए और सो गया।” यह उनकी संघर्ष की कहानी को दर्शाता है, जो आज भी प्रेरणादायक है।
निष्कर्ष
राकेश बेदी की कहानी सिखाती है कि संघर्ष का सामना करते हुए आगे बढ़ना और अपनी कला को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने न केवल अपने करियर में सफलता पाई है, बल्कि अपने अनुभवों से हमें यह भी बताया है कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मेहनत और संकल्प से सब कुछ हासिल किया जा सकता है।
















